मानसिक स्वास्थ्य: मन की आवाज़ सुनना भी उतना ही ज़रूरी है
मानसिक स्वास्थ्य: मन की आवाज़ सुनना भी उतना ही ज़रूरी है हम अक्सर अपने शरीर की थकान को पहचान लेते हैं। भूख लगे तो खाना खाते हैं। प्यास लगे तो पानी पीते हैं। बुखार आए तो आराम करते हैं। लेकिन जब मन थक जाता है , तब क्या हम उसकी आवाज़ सुनते हैं? कई बार नहीं। हम मुस्कुराते रहते हैं, काम करते रहते हैं, दूसरों की मदद करते रहते हैं और बाहर से बिल्कुल सामान्य दिखाई देते हैं। लेकिन अंदर ही अंदर हमारा मन बहुत कुछ सह रहा होता है। आज की तेज़ जिंदगी में मानसिक स्वास्थ्य के बारे में बात करना पहले से कहीं अधिक जरूरी हो गया है। मानसिक स्वास्थ्य का अर्थ केवल मानसिक बीमारी का न होना नहीं है। इसमें हमारी भावनाएँ, तनाव से निपटने की क्षमता, रिश्ते, सोच और रोज़मर्रा के जीवन को संभालने की क्षमता भी शामिल होती है। “चेहरे की मुस्कान हमेशा मन की कहानी नहीं बताती।” मानसिक स्वास्थ्य क्या है? मानसिक स्वास्थ्य का संबंध हमारे सोचने, महसूस करने और परिस्थितियों से सामना करने के तरीके से है। हर व्यक्ति के जीवन में कभी खुशी आती है, कभी दुख, कभी चिंता और कभी निराशा। इन भावनाओं का आना...